समझे थे जिसका हर इशारा, आज उसका ये अंदाज़ समझे हम..
समझ गए थे पहली नज़र में उसकी बेरुखी, बस बेरुखी का हिसाब न समझे हम |
ख़ामोशी सारी समझते थे उसकी, जिसके वो दो अलफ़ाज़ न समझे हम |
नज़रे मिलाने से ना डरे कभी जिससे, उसी की नज़रे फेर लेने का मतलब न समझे हम....