मुस्कराहट ऐसे खिल उठी जैसे,
सावन आया हो पतझड़ बीतने के बाद...
गले लगाया हर एक पल को ऐसे ,
जैसे तरस रहे थे कबसे फैलकर सिमटने को हाथ...
समझे थे जिसका हर इशारा, आज उसका ये अंदाज़ समझे हम.. समझ गए थे पहली नज़र में उसकी बेरुखी, बस बेरुखी का हिसाब न समझे हम | ख़ामो...