सोचा है कभी जिनके घर नहीं होते,उनकी ज़िन्दगी कैसे बीतती होगी
दिन तो काट जाता होगा उनका, उनकी रात नहीं कटती होगी।
सोचा है कभी जिनके घर नहीं होते , उनकी ज़िन्दगी कैसे बीतती होगी,
जब तेज रफ़्तार में तुहारी गाड़ी, उनके बहुत करीब से गुज़रती होगी।
तब उनकी धड़कन आखिरी धड़कन से, ज़रा ही कम धड़कती होगी
सोचा है कभी जिनके घर नहीं होते, उनकी ज़िन्दगी कैसे बीतती होगी।
बारिश की ख्वाहिश करते हो हरपल, अरे उनपर तो हर बूँद टपकती होगी,
गीली ज़मीन पर लेते-लेते कैसे उनकी वो रात सिसकती होगी,
सोचा है कभी जिनके घर नहीं होते, उनकी ज़िन्दगी कैसे बीतती होगी।।