ना नींद अपनी होती है ना ख़्वाब अपने होते हैं..
जब इश्क़ के मंज़र से गुज़रता है कोई..
आशिक़ के आँखों में ही सोते और अश्क़ो में रोते हैं...
समझे थे जिसका हर इशारा, आज उसका ये अंदाज़ समझे हम.. समझ गए थे पहली नज़र में उसकी बेरुखी, बस बेरुखी का हिसाब न समझे हम | ख़ामो...
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