उन्हें सब्र मेरे दीदार तक का नहीं,
और हम ना जाने कितने जवाब लिए बैठे हैं...
कब कौन-सा सवाल मुझपर इल्ज़ाम बन जाये,
के, हम दर्द भी अपना सिर्फ अपने आप से कहते हैं..
समझे थे जिसका हर इशारा, आज उसका ये अंदाज़ समझे हम.. समझ गए थे पहली नज़र में उसकी बेरुखी, बस बेरुखी का हिसाब न समझे हम | ख़ामो...
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