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Wednesday, 1 February 2017

उन्हें सब्र मेरे दीदार तक का नहीं,
और हम ना जाने कितने जवाब लिए बैठे हैं...
कब कौन-सा सवाल मुझपर इल्ज़ाम बन जाये,
के, हम दर्द भी अपना सिर्फ अपने आप से कहते हैं.. 

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नज़रे फेर लेने का मतलब न समझे हम

समझे थे जिसका हर इशारा, आज उसका ये अंदाज़  समझे  हम.. समझ गए थे पहली नज़र में उसकी बेरुखी, बस बेरुखी का हिसाब न समझे  हम |  ख़ामो...