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Wednesday, 30 August 2017

हक़ीकत

हक़ीकत में जीने के लिए, ख्वाबों को कैसे छोड़ दू.... 
ये वही हैं जिसने हक़ीक़त को मुझे तोड़ने से बचाया है... 

नज़रे फेर लेने का मतलब न समझे हम

समझे थे जिसका हर इशारा, आज उसका ये अंदाज़  समझे  हम.. समझ गए थे पहली नज़र में उसकी बेरुखी, बस बेरुखी का हिसाब न समझे  हम |  ख़ामो...