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Wednesday, 23 November 2016

वक़्त-बे-वक़्त का मुस्कुराना भारी पड़ गया

वक़्त-बे-वक़्त का मुस्कुराना भारी पड़ गया,
जब सुना किसीसे कि, तेरे मुस्कुराहट पर मरते हैं हम। 

1 comment:

  1. Gile shikwe na dil se
    Laga lena..!
    Kabhi maan jana to
    Kabhi manaa lena..!
    Kal ka kya pata "hum ho na ho"
    Jab mauka mile thoda
    Hass lena aur hasaa dena

    ReplyDelete

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