हर बात को मेरा समझना यूँ ज़रूरी तो नहीं मगर,
जिस बात में ज़िक्र तेरा हो, मेरे ज़ेहन में रहना लाज़मी सा है....
जिस बात में ज़िक्र तेरा हो, मेरे ज़ेहन में रहना लाज़मी सा है....
समझे थे जिसका हर इशारा, आज उसका ये अंदाज़ समझे हम.. समझ गए थे पहली नज़र में उसकी बेरुखी, बस बेरुखी का हिसाब न समझे हम | ख़ामो...
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