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Monday, 5 December 2016

चाहतें सब की पूरी हों ये नामुमकिन सा है

चाहतें सब की पूरी हों ये नामुमकिन सा है,
   कि कोई ख़ुदाई, तो कोई ख़ुद ख़ुदा को मांगता है...... 

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समझे थे जिसका हर इशारा, आज उसका ये अंदाज़  समझे  हम.. समझ गए थे पहली नज़र में उसकी बेरुखी, बस बेरुखी का हिसाब न समझे  हम |  ख़ामो...